Sunday, December 23, 2018

शख्स...

ये उस शख्स की कहानी है, जिसकी बातें रूहानी है।
बातें जो लबों से बेजुबानी हैं,आंखों से सब वो बतानी हैं।

जो कहती है जिंदगी के सफर में बस साथ तेरा चाहिए,
घर-बार,रिश्ते-नाते सब छूट जाएं,हाथों में हाथ तेरा चाहिए।
जिसमें भींगू मैं हाथ थाम कर तेरा, बरसात ऐसी चाहिए,
मिल कर हो न फिर कभी जुदा, एक रात ऐसी चाहिए।

वो पगली मुझे अपने ख्वाबों में बसा लेती है,
हर रात सपनों में आके मेरे, उन्हें हसीन बना देती है।
और रूठ कर जिस पल बात न करे मुझसे,
उस पल अपनी यादों से मुझे गमगीन बना देती है।

हां ये वहीं शख्स हैं, जो अपनी दुआओं में मुझे आमीन बना लेती है।

समझता हूं मैं भी कि
सारे बंधन जग से तोड़ कर हुई प्रेम में मेरे वो दीवानी है।
मैं भी हूं बावरा प्रेम में उसके, वो भी कुछ मस्तानी है।

ये उस शख्स की कहानी है, जिसकी बातें रूहानी हैं।

यूं तो ,
मैं तन उसका ,वो छाया मेरी।
मैं रूह उसका, वो काया मेरी।
वो सांस बनीं मेरे अन्दर है,
मैं बूंद, वो प्रीति समंदर है।

फिर भी मालूम है मुझे,
न हूं मैं कान्हा उसका।
पर हां, हां वो मेरी राधारानी है।

ये उस शख्स की कहानी है जिसकी बातें रूहानी हैं।।



-Collab (तरूणा चौरसिया, ओमकार भास्कर)

Sunday, December 9, 2018

कुछ कहती ये खामोशी

यारों,
इक लड़की है,
जो हर रात मेरी बेरूखी बातें सुन ख़ामोश हो जाती है।
टूट जाती है खुद अंदर ही अंदर,
पर फिर भी मुझ पर प्यार दिखाती है।

आज भी हुआ कुछ ऐसा ही,
न चाहते हुए भी कुछ बातें में बोल गया वैसा ही।
वो फिर हुइ ख़ामोश बस ,
जैसा हुआ कोई अफसोस बस।

परन्तु इस बार ये खामोशी कुछ और थी,
मेरे कानों में ये आज कर रही शोर थी।
जैसे ये मुझसे कह रही हों,

कोई रूठ गया आज।
धागा पतंग से बस टूट गया आज।
दिल जो दुखाया तूने उसका
पी गई वो आंसुओं के घूंट आज।

पर वो पगली कल फिर उठेगी सिर्फ तेरे ही ख्यालों संग,
दिल में भर कर प्यार की नई उमंग,
रहेगी फिर तेरे ही साये में नयी उम्मीद के संग।

हो सके तो तू बस इतना कर देना,
दिल से हटा कर शक की सिलवटें, उसे गले लगाना।
गर माफी न मांग सको अपनी गलती की,
तो कोई बात नहीं।
परन्तु फिर कभी उन आंखों में आंसू और चेहरे पे मुझे न आने देगा,
इतनी सी बात उसे कहना।

और खुश तो हो ही जाएगी , फिर तेरे नजदीक आते ही।
लेकिन सुन, यूं जो तू हर बार शक करता रहा,
तो एक दिन तुझे ही रूला देगी इस जहां से जाते ही।

तब तू रोयेगा , चीखेगा , चिल्लायेगा उस लाश के पास,
पर सब व्यर्थ है, तब उसको न होगा कुछ एहसास।

सुनकर उसकी खामोशी से कुछ ये बात,
मुझे और सताने लगी ये रात।
बस हर वक्त याद आती रहीं मुझे ,
आंसुओं से भींगी उसकी वो आंख।

कसम मुझे उन आंखों की,
उन आंखों से पोंछ आंसू मासूमियत मैं फिर लाउंगा।
ये सुबह कब होगी , मैं अपनी जांना से मिलने जाउंगा।
लगा सीने से कह दूंगा उसे , तूझे फिर कभी न सताउंगा।

देगी मुझे  जो  भी  सज़ा , कर  लूंगा वो मंजूर।
ला आंखों में आंसू उसकी, किया है मैंने कसूर।

#random_thought
#edited


- Omkar Bhaskar 

Saturday, December 8, 2018

कोशिश तो कीजिए

रख दिल में कभी हौसले कोशिश तो कीजिए,
मिल जाएंगी सब मंजिलें कोशिश तो कीजिए।

करिये कभी कोशिश  कि रूठे मान जाएं सब,
मिट जायेंगे शिकवे गिले कोशिश तो कीजिए।

है इश्क़ गर  दिल  में तो  बगावत करो  हूज़ूर,
बदलेगा रब भी  फ़ैसले कोशिश तो  कीजिए।

तुम फेंक दो  उतार कर  तन्हाई का  लिबास,
स्वागत करेंगी महफिलें कोशिश तो कीजिए।

तुम  रौब के  नश्तर को  बदन से तो  हटाओ,
दुनिया लगाएगी  गले  कोशिश  तो कीजिए।



- तरूणा चौरसिया 

Sunday, December 2, 2018

ग़ज़ल

हालात- ए -हिज्र में  गुमनाम  हुआ  एक ख़्वाब है,
रूबरू हुआ तन्हाई से, जिंदगी में आया सैलाब है।

दर्द  के  साये  में  भी  हरपल  मुस्कुराता  रहा  वो,
जैसे  कांटों  की  कैद में  महकता कोई  गुलाब है।

उभरना चाहता है सितम-ए-मोहब्बत से इस कदर,
डूबा हुआ  महताब जैसे,  फिर उगने को बेताब है।

रिहा  जो  हुआ  किसी  की  यादों  की  गिरफ्त  से,
तासीर  जमाई  है  अब ऐसी, कहते  सब नवाब है।

सिखलाता है जो हर्फ-दर-हर्फ नसीहतें अपनी, जिंदगी
रिश्तों में  प्यार  और  सामंजस्य  की  एक  किताब  है।

- ओमकार भास्कर

Friday, November 16, 2018

हालात...

तुम्हें मैं भूल जाऊं कैसे...
इतनी जो यादें हैं मेरी तुम्हारे साथ...
उन्हें दिल से मिटाऊं कैसे....
वो मेरी बाहों में आ जब तू रोई थी...
तेरा माथा चूम तब तुझको मैंने समझाया था...
तेरे साथ न होते हुए भी तेरे साथ रहूंगा मैं
ये बात मैंने तुझको बतलाया था...
चल अब तू ही बता इस बात को मैं झूठलाऊं कैसे...
और जो तुम कहती हो "यार मैं बेवफा हूं"
चलो मान तो लूं तुम्हें बेवफा मैं...
पर उससे पहले अपनी वफ़ा साबित करूं कैसे...
सुनो मैं जानता हूं, न तू गलत है न मैं हूं गलत...
पर हैं जो ये हालात गलत...
ऐसे हालात में अगर तुझे अकेला छोड़ दूं... तो मैं खुद से नजरें मिलाऊ कैसे...
हुआ जो रिश्ता छोटी सी दोस्ती से शुरू..
उसे यूं ही तोड़ दूं तो तेरा पक्का दोस्त कहलाऊं कैसे...
इस हालात के फेर में खुद को बेवफा कहने से पहले सुनो,
जिंदगी के हालातों से मैं कभी डरा नहीं...
इतनी जल्दी में हार मान लूं...
ऐसे कभी मैं लड़ा नहीं
बस मुझ पर थोड़ा भरोसा रखो...
अभी मैं मरा नहीं...

- Omkar Bhaskar

Wednesday, October 31, 2018

तन्हा मुसाफ़िर...

उसकी यादों में आज भी बसर करता हूं...
हूं एक तन्हा मुसाफ़िर मैं, आज भी सिर्फ उसके ख्वाबों का सफर करता हूं...
छोड़ गया जो बीच राह में मुझे वो हमसफ़र मेरा...
उसके झूठे जज़्बातों की आज भी कदर करता हूं...
उसकी यादों में आज भी बसर करता हूं...
दिल से तो निकाल दिया है उस पत्थर दिल को...
पर ज़ेहन में आज भी उसी का ख्याल है...
शायद इसीलिए अपनी हर नज़्म में उसी का जिक्र करता हूं...
यूं तो चांदनी रात में रकीब का साथ बहुत अज़ीज़ है उसे...
पर यकीन मानिए मैं आज भी इस भ्रम में हूं ,
कि सिर्फ मैं ही उसकी फिक्र करता हूं...
उसकी यादों में आज भी बसर करता हूं...
वैसे तो उसने निभाई नहीं कभी वफ़ा अपनी...
पर कोशिश जो करता हूं लिखने की उसे बेवफा...
न जाने क्यों ऐसा लगता है मैं ग़लत करता हूं...
उसकी यादों में आज भी बसर करता हूं...
हूं एक तन्हा मुसाफ़िर मैं, आज भी सिर्फ उसके ख्वाबों का सफर करता हूं... 





- OMKAR BHASKAR

Saturday, October 20, 2018

मिलें भी तो...

मिलें भी तो इस कदर...
साथ होकर भी साथ नहीं...
एक दुसरे का सुख दुख बांटने वाले हमसफ़र...
वक्त के खेल में उलझे इस कदर...
हाथों में हाथ होकर भी जिंदगी भर का साथ नहीं...
आंखों की तस्तरी से निकाल महफ़िल में परोसी जो यादें...
लोगों ने कहा कुछ तो बात है...
पर कोई ये न जाने,अब वो बात नहीं ...✍✍


- Omkar Bhaskar
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Tuesday, October 16, 2018

चले आओ...

चले आओ तुम्हें हम याद करते हैं...
तुम्हारी बातों से होता था कभी खुशनुमा एहसास जो...
आज उस एहसास को तरसते हैं...
वैसे तो ख्वाबों में भी तुम्हारी ही यादें , तुम्हारी ही बातें है...
पर फिर भी खुली आंखों से याद आते हैं जो संग बिताए पल...
उनकी आरज़ू में रातों की नींद भी बर्बाद करते हैं...
कि चले आओ तुम्हें हम याद करते हैं...
तेरी नज़रों से हुई थी कभी दिल में कशिश जो...
बस उन्हीं नज़रों को एक नज़र देखने को बैचेन रहते हैं...
हुई थी जो हमसे कुछ गुस्ताखियां..
शायद ये उन्हीं की सजा है कि आज तेरी याद में हम पल-पल मरते हैं ...
कि चले आओ तुम्हें हम याद करते हैं...
वैसे तो मोहब्बत में तेरी हर सज़ा है हमें मंजूर...
पर यूं दूर जा कर न दो सज़ा हमें...
कि लौट आओ अब तुम, तुमसे गुस्ताख़ी माफ़ की अब फरियाद करते हैं...
कि चले आओ तुम्हें हम याद करते हैं...
कि चले आओ तुम्हें हम याद करते हैं...


- Omkar Bhaskar

Thursday, October 11, 2018

गुमनाम लड़की...

इक लड़की है गुमनाम सी...
दुनिया की बातों से अंजान सी...
रहती है अपने ही गम में वो परेशान सी...
किसी की यादों में खोई रहती...
किसी की बातें दिल में संजोए रहती...
ढूंढती किसी चेहरे में तस्वीर एक, भगवान सी...
इक लड़की है गुमनाम सी...
वो चेहरा जो था दिल उसका तोड़ गया...
मुड़ती राहों में साथ उसका छोड़ गया...
पर वो आज भी है खड़ी उसी जगह...
उसका दिल, उसकी मोहब्बत आज भी सिर्फ उस
चेहरे के लिए है पाक...
किसी क़ाज़ी के कुरान सी...
मस्जिद में होने वाली अजान सी...
उसकी यादों में वो रोज टूटती, रोज बिखरती ...
पर हर बार संभालती खुद को ...
बनाने निकली है अब वो अपनी पहचान सी...
इक लड़की है गुमनाम सी...
चाहता तो हूं लिखना इक मुकम्मल किताब उस पर...
ग़ालिब के दीवान सी....
पर बस , रहने दीजिए ,इतना समझ लिजिए ...
इक लड़की है गुमनाम सी...
रहती है अपने ही गम में वो परेशान सी...

- OMKAR BHASKAR

Sunday, October 7, 2018

कानपुर, यादों का शहर...

कानपुर, यादों का शहर...
खुद से किये कुछ अधूरे वादों का शहर...
लोगों की भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाने के लिये.. देखे जो अनगिनत ख्वाब....
कानपुर, उन ख़्वाबों का शहर...
कानपुर,यादों का शहर...
रक्षाबंधन‌ में बहनों के हाथों ज्यादा मिठाई खाने के लिये..
हम सभी भाइयों में होने वाली छोटे-छोटे पर प्यारे विवाद..
कानपुर, उन विवादों का शहर...
किसी दूसरे शहर, जिसकी सबसे ज्यादा याद आती है...
वो मां और मां के खाने का स्वाद...
कानपुर, उन स्वादों का शहर...
कानपुर, यादों का शहर...
स्कूल से लेकर कालेज तक...
जितने भी हुए यार-दोस्त अपने...
और उन सबके साथ मिलकर किये जितने भी कर्म-कांड...
कानपुर, उन कर्म-कांडो का शहर...
कानपुर, यादों का शहर...
जिन गलियों में हुआ मुझे इश्क कभी...
जहां भीगा मैं अपनी माशूका संग बरसातों में...
कानपुर, उन बरसातों का शहर...
कानपुर, यादों का शहर...
कानपुर, यादों का शहर...

OMKAR BHASKAR