तुम्हें मैं भूल जाऊं कैसे...
इतनी जो यादें हैं मेरी तुम्हारे साथ...
उन्हें दिल से मिटाऊं कैसे....
वो मेरी बाहों में आ जब तू रोई थी...
तेरा माथा चूम तब तुझको मैंने समझाया था...
तेरे साथ न होते हुए भी तेरे साथ रहूंगा मैं
ये बात मैंने तुझको बतलाया था...
चल अब तू ही बता इस बात को मैं झूठलाऊं कैसे...
और जो तुम कहती हो "यार मैं बेवफा हूं"
चलो मान तो लूं तुम्हें बेवफा मैं...
पर उससे पहले अपनी वफ़ा साबित करूं कैसे...
सुनो मैं जानता हूं, न तू गलत है न मैं हूं गलत...
पर हैं जो ये हालात गलत...
ऐसे हालात में अगर तुझे अकेला छोड़ दूं... तो मैं खुद से नजरें मिलाऊ कैसे...
हुआ जो रिश्ता छोटी सी दोस्ती से शुरू..
उसे यूं ही तोड़ दूं तो तेरा पक्का दोस्त कहलाऊं कैसे...
इस हालात के फेर में खुद को बेवफा कहने से पहले सुनो,
जिंदगी के हालातों से मैं कभी डरा नहीं...
इतनी जल्दी में हार मान लूं...
ऐसे कभी मैं लड़ा नहीं
बस मुझ पर थोड़ा भरोसा रखो...
अभी मैं मरा नहीं...
इतनी जो यादें हैं मेरी तुम्हारे साथ...
उन्हें दिल से मिटाऊं कैसे....
वो मेरी बाहों में आ जब तू रोई थी...
तेरा माथा चूम तब तुझको मैंने समझाया था...
तेरे साथ न होते हुए भी तेरे साथ रहूंगा मैं
ये बात मैंने तुझको बतलाया था...
चल अब तू ही बता इस बात को मैं झूठलाऊं कैसे...
और जो तुम कहती हो "यार मैं बेवफा हूं"
चलो मान तो लूं तुम्हें बेवफा मैं...
पर उससे पहले अपनी वफ़ा साबित करूं कैसे...
सुनो मैं जानता हूं, न तू गलत है न मैं हूं गलत...
पर हैं जो ये हालात गलत...
ऐसे हालात में अगर तुझे अकेला छोड़ दूं... तो मैं खुद से नजरें मिलाऊ कैसे...
हुआ जो रिश्ता छोटी सी दोस्ती से शुरू..
उसे यूं ही तोड़ दूं तो तेरा पक्का दोस्त कहलाऊं कैसे...
इस हालात के फेर में खुद को बेवफा कहने से पहले सुनो,
जिंदगी के हालातों से मैं कभी डरा नहीं...
इतनी जल्दी में हार मान लूं...
ऐसे कभी मैं लड़ा नहीं
बस मुझ पर थोड़ा भरोसा रखो...
अभी मैं मरा नहीं...
- Omkar Bhaskar
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