इक लड़की है गुमनाम सी...
दुनिया की बातों से अंजान सी...
रहती है अपने ही गम में वो परेशान सी...
किसी की यादों में खोई रहती...
किसी की बातें दिल में संजोए रहती...
ढूंढती किसी चेहरे में तस्वीर एक, भगवान सी...
इक लड़की है गुमनाम सी...
वो चेहरा जो था दिल उसका तोड़ गया...
मुड़ती राहों में साथ उसका छोड़ गया...
पर वो आज भी है खड़ी उसी जगह...
उसका दिल, उसकी मोहब्बत आज भी सिर्फ उस
चेहरे के लिए है पाक...
किसी क़ाज़ी के कुरान सी...
मस्जिद में होने वाली अजान सी...
उसकी यादों में वो रोज टूटती, रोज बिखरती ...
पर हर बार संभालती खुद को ...
बनाने निकली है अब वो अपनी पहचान सी...
इक लड़की है गुमनाम सी...
दुनिया की बातों से अंजान सी...
रहती है अपने ही गम में वो परेशान सी...
किसी की यादों में खोई रहती...
किसी की बातें दिल में संजोए रहती...
ढूंढती किसी चेहरे में तस्वीर एक, भगवान सी...
इक लड़की है गुमनाम सी...
वो चेहरा जो था दिल उसका तोड़ गया...
मुड़ती राहों में साथ उसका छोड़ गया...
पर वो आज भी है खड़ी उसी जगह...
उसका दिल, उसकी मोहब्बत आज भी सिर्फ उस
चेहरे के लिए है पाक...
किसी क़ाज़ी के कुरान सी...
मस्जिद में होने वाली अजान सी...
उसकी यादों में वो रोज टूटती, रोज बिखरती ...
पर हर बार संभालती खुद को ...
बनाने निकली है अब वो अपनी पहचान सी...
इक लड़की है गुमनाम सी...
चाहता तो हूं लिखना इक मुकम्मल किताब उस पर...
ग़ालिब के दीवान सी....
पर बस , रहने दीजिए ,इतना समझ लिजिए ...
इक लड़की है गुमनाम सी...
रहती है अपने ही गम में वो परेशान सी...
ग़ालिब के दीवान सी....
पर बस , रहने दीजिए ,इतना समझ लिजिए ...
इक लड़की है गुमनाम सी...
रहती है अपने ही गम में वो परेशान सी...
- OMKAR BHASKAR
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