Tuesday, October 16, 2018

चले आओ...

चले आओ तुम्हें हम याद करते हैं...
तुम्हारी बातों से होता था कभी खुशनुमा एहसास जो...
आज उस एहसास को तरसते हैं...
वैसे तो ख्वाबों में भी तुम्हारी ही यादें , तुम्हारी ही बातें है...
पर फिर भी खुली आंखों से याद आते हैं जो संग बिताए पल...
उनकी आरज़ू में रातों की नींद भी बर्बाद करते हैं...
कि चले आओ तुम्हें हम याद करते हैं...
तेरी नज़रों से हुई थी कभी दिल में कशिश जो...
बस उन्हीं नज़रों को एक नज़र देखने को बैचेन रहते हैं...
हुई थी जो हमसे कुछ गुस्ताखियां..
शायद ये उन्हीं की सजा है कि आज तेरी याद में हम पल-पल मरते हैं ...
कि चले आओ तुम्हें हम याद करते हैं...
वैसे तो मोहब्बत में तेरी हर सज़ा है हमें मंजूर...
पर यूं दूर जा कर न दो सज़ा हमें...
कि लौट आओ अब तुम, तुमसे गुस्ताख़ी माफ़ की अब फरियाद करते हैं...
कि चले आओ तुम्हें हम याद करते हैं...
कि चले आओ तुम्हें हम याद करते हैं...


- Omkar Bhaskar

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