Sunday, December 9, 2018

कुछ कहती ये खामोशी

यारों,
इक लड़की है,
जो हर रात मेरी बेरूखी बातें सुन ख़ामोश हो जाती है।
टूट जाती है खुद अंदर ही अंदर,
पर फिर भी मुझ पर प्यार दिखाती है।

आज भी हुआ कुछ ऐसा ही,
न चाहते हुए भी कुछ बातें में बोल गया वैसा ही।
वो फिर हुइ ख़ामोश बस ,
जैसा हुआ कोई अफसोस बस।

परन्तु इस बार ये खामोशी कुछ और थी,
मेरे कानों में ये आज कर रही शोर थी।
जैसे ये मुझसे कह रही हों,

कोई रूठ गया आज।
धागा पतंग से बस टूट गया आज।
दिल जो दुखाया तूने उसका
पी गई वो आंसुओं के घूंट आज।

पर वो पगली कल फिर उठेगी सिर्फ तेरे ही ख्यालों संग,
दिल में भर कर प्यार की नई उमंग,
रहेगी फिर तेरे ही साये में नयी उम्मीद के संग।

हो सके तो तू बस इतना कर देना,
दिल से हटा कर शक की सिलवटें, उसे गले लगाना।
गर माफी न मांग सको अपनी गलती की,
तो कोई बात नहीं।
परन्तु फिर कभी उन आंखों में आंसू और चेहरे पे मुझे न आने देगा,
इतनी सी बात उसे कहना।

और खुश तो हो ही जाएगी , फिर तेरे नजदीक आते ही।
लेकिन सुन, यूं जो तू हर बार शक करता रहा,
तो एक दिन तुझे ही रूला देगी इस जहां से जाते ही।

तब तू रोयेगा , चीखेगा , चिल्लायेगा उस लाश के पास,
पर सब व्यर्थ है, तब उसको न होगा कुछ एहसास।

सुनकर उसकी खामोशी से कुछ ये बात,
मुझे और सताने लगी ये रात।
बस हर वक्त याद आती रहीं मुझे ,
आंसुओं से भींगी उसकी वो आंख।

कसम मुझे उन आंखों की,
उन आंखों से पोंछ आंसू मासूमियत मैं फिर लाउंगा।
ये सुबह कब होगी , मैं अपनी जांना से मिलने जाउंगा।
लगा सीने से कह दूंगा उसे , तूझे फिर कभी न सताउंगा।

देगी मुझे  जो  भी  सज़ा , कर  लूंगा वो मंजूर।
ला आंखों में आंसू उसकी, किया है मैंने कसूर।

#random_thought
#edited


- Omkar Bhaskar 

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