Tuesday, January 8, 2019

बेटी कह रही मां से

बेटी कह रही मां से
न दे जन्म मुझे तू माँ,
मार दे अपनी सुन्दर कोख में
जन्नत बक्स दे मुझे तू माँ,
नहीं आना हैवानो की दुनिया में
बहुत इज्ज़त से हूँ यहाँ मैं माँ
सोती भी सुकून से हूँ
मुस्कुराती भी यहाँ मैं माँ,
वो दुनियां बड़ी नापाक है
तेरी नजरों से देखा है मैंने माँ
इज्ज़त से खेलते है वहाँ औरत की
और गलत भी उन्हें ही कहते है माँ,
कपड़ो का दोष बताते है
फिर बच्चियों का रेप यहाँ क्यों हो जाता है माँ
खुद की नजरों को ना सुधारते
और हमें गिरा हुआ क्यो बताते है ये माँ,
पत्थर की देवी की पूजा करते
फिर हमें इतना क्यों सताते है ये माँ
बाबा कितने अच्छे हैं
उनकी तरह सब क्यों नहीं है माँ ,
कब बंद होगी ये हैवानियत
तू कुछ बताती क्यों नहीं है माँ
आ जाऊ मैं बाहर
या यहीं सुकून से सो जाऊ मैं माँ ।।


-©चाँदनी पाठक 

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