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Sunday, February 3, 2019

कितने प्यारे फूल खिले है....

कितने प्यारे फूल खिले है,
अंजाम अपना भूल, खिले हैं।

हैरान मेरी कामयाबी पर,
रकीबों के भी होठ सिले है।

अब न बिछड़ेगे हम कभी,
उलझनों से ये दिल मिले है।

नजरों में है हया- ए -मोहब्बत,
शायद यहाँ रुह से रुह मिले है।

अपनों ने दिया धोखा जब-जब,
कुछ पराये हमराही साथ चले है।

नहीं शौक कि कोई शायर कहे, 
हम तो मियाँ बस दिलजले है।

अल्लाह की इनायत है मुझ पर,
बाजार-ए-नफरत में नहीं घुले है।


-©ओमकार भास्कर 'दास'